Bengal Election 2026 Mamata Banerjee Resign : कभी NDA सरकार में केंद्रीय मंत्री थीं ममता बनर्जी, फिर कैसे बढ़ गई इस गठबंधन से दूरी?

Bengal Election 2026 Mamata Banerjee Resign : पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित हुए. इस बार बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की और पिछले 15 सालों से सत्ता में रही टीएमसी की सरकार हार गई. नतीजों के बाद से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी काफी सख्त और आक्रामक नजर आ रही हैं. उनकी पार्टी टीएमसी को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.  इस हार के बाद भी ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि वे मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ेंगी.

उन्होंने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए, जैसे वोटों की गड़बड़ी और मतगणना केंद्र पर उनके साथ गलत होना, लेकिन आज भले ही बीजेपी और टीएमसी एक-दूसरे के बड़े विरोधी हों और ममता बनर्जी मोदी सरकार की आलोचक हों, लेकिन ऐसा समय भी था.जब टीएमसी और बीजेपी के बीच गठबंधन था.उस दौरान ममता बनर्जी केंद्र की एनडीए सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जो साथ कभी सरकार में था, वह गठबंधन आगे चलकर कैसे टूट गया और ममता बनर्जी की इससे दूरी कैसे बढ़ती गई. तो आइए जानते हैं कि कभी NDA सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं ममता बनर्जी की इस गठबंधन से कैसे दूरी बढ़ गई . 

TMC की शुरुआत और अलग राजनीतिक पहचान

ममता बनर्जी ने साल 1997 में कांग्रेस पार्टी छोड़कर अपनी अलग राजनीतिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) बनाई. उनका उद्देश्य पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया ऑप्शन तैयार करना था. शुरुआती दौर में उनकी पार्टी का आधार मजबूत नहीं था, इसलिए उन्होंने बड़े राजनीतिक गठबंधनों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाई. 

कभी NDA सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं ममता बनर्जी

1998 के लोकसभा चुनावों में TMC ने पहली बार बड़े स्तर पर चुनाव लड़ा और कुछ सीटें जीतीं. इसके बाद पार्टी ने National Democratic Alliance (NDA) के साथ गठबंधन कर लिया. इस दौर में TMC और BJP एक साथ चुनाव लड़ते थे और एक-दूसरे के सहयोगी माने जाते थे. यह गठबंधन पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी दलों के खिलाफ एक मजबूत ऑप्शन बनकर उभरा. 

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री पद

1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में NDA सरकार बनी, तब  ममता बनर्जी को केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया.  यह उनके राजनीतिक करियर का बड़ा मोड़ था. रेल मंत्री के रूप में उन्होंने कई फैसले लिए और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान मजबूत की, हालांकि उनके कार्यकाल में कुछ फैसलों और राजनीतिक मतभेदों को लेकर NDA के भीतर असंतोष भी बढ़ने लगा. 

गठबंधन में कब आई  दूरी बढ़ना

समय के साथ  ममता बनर्जी और NDA नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने लगे.कई नीतिगत मुद्दों पर असहमति, पश्चिम बंगाल की राजनीति में अलग रणनीति और गठबंधन की प्राथमिकताओं को लेकर टकराव होने लगा. इन कारणों से 2001 के आसपास उन्होंने NDA से दूरी बना ली. हालांकि बाद में कुछ समय के लिए वे फिर से NDA में लौट आईं, लेकिन यह संबंध पहले जैसा मजबूत नहीं रहा. 

यह भी पढ़ें – Vijay Thalapathy Father Blueprint : क्या करते हैं विजय थलपति के पिता, जिन्होंने तैयार किया उनकी जीत का ब्लू प्रिंट?

UPA सरकार में वापसी और नया राजनीतिक गठबंधन

2004 के लोकसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए. इस बार United Progressive Alliance (UPA) सत्ता में आई और TMC ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया. इस दौरान भी  ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार में रेल मंत्री के रूप में काम किया. 

ममता बनर्जी की इस गठबंधन से कैसे दूरी बढ़ गई?

समय के साथ ममता बनर्जी  का राजनीतिक रुख पूरी तरह बदल गया. वे BJP और NDA की नीतियों की खुलकर आलोचना करने लगीं. इसके प्रमुख कारण वैचारिक मतभेद , संघ परिवार की राजनीति पर असहमति, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, केंद्र और राज्य के बीच टकराव माने जाते हैं.धीरे-धीरे यह दूरी इतनी बढ़ गई कि वे BJP की सबसे मजबूत विरोधी बनकर उभरीं. आज ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती हैं. वे राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी राजनीति का अहम चेहरा हैं. 

 यह भी पढ़ें – Election 2027 BJP Challenges : किन राज्यों में अगले साल होने हैं चुनाव, जानिए बीजेपी के लिए वहां क्या होंगी चुनौतियां?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *